Facebook की नई फैक्ट-चैकिंग टूल

फर्जी और विवादित न्यूज़ पोस्ट और वीडियोज को लेकर Facebook अक्सर हाईलाइट में रहता हैं और यूरोपियन संघ समय-समय पर Facebook पर क्लेम करता रहता हैं| अभी कुछ दिन पहले Cambridge Analytica और Facebook दोनों द्वारा Data लीक करने का विवाद सामने आया था| जिसके बाद यूरोपियन संघ ने मार्क जकरबर्ग से Data Privacy को लेकर काफी सवालात किए थे और Cambridge Analytica के CEO को Resign करना पड़ा था|
ये कोई पहली बार नहीं था| इससे पहले भी Facebook पर आरोप लगते आए हैं| चाहे वो 2014 को Indian Election हो या फिर America में Donald Trump की सरकार का बनना| इन सब में कहीं-न-कहीं Facebook पर अँगुली उठी थी कि Facebook पर गलत खबर फैलाकर जनता के मत को बदला गया था और उन्हें भ्रमित किया गया था| जो कि एक हद तक सही भी था|

Facebook
पर Facebook की माने तो अब उसने इस समस्या से निजात पाने का कारगर तरीका खोज लिया हैं| Facebook ने घोषणा की हैं कि अब वो अपने प्लेटफ़ॉर्म पर अपडेट की जाने वाली खबरें, फोटोज और वीडियोज की निगरानी के लिए फैक्ट-चेकिंग टूल्स लेकर आएगी| वैसे आपको बता दे कि ये टूल्स सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म पर टेक्स्ट और लिंक्स के लिए पहले ही उपलब्ध है| 17 देशों की 27 कंपनियों के साथ मिलकर Facebook ने ये टूल डवलप किया हैं| Facebook पहले से ही प्लेटफ़ॉर्म पर छपने वाले आर्टिकल्स को रिव्यु करने के लिए स्वतंत्र, थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स के साथ काम कर रहा हैं|

फर्जी फोटोज और विडियोज को Facebook ने तीन कैटेगरीज में बांटा हैं :-

पहला (मैनिपुलेटेड या फैब्रिकेटेड) – वो कंटेंट जो यूजर को धोखा देने के लिए बनाया जाता हैं|
दूसरा (आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट) – वो कंटेंट जो प्रमाणिक तो होता हैं मगर उसकी गलत व्याख्या की गयी होती हैं|
तीसरा – वो फोटोज और विडियोज जिनमें फर्जी टेक्स्ट या ऑडियो होता हैं।

फैक्ट-चेकिंग टूल का काम करने का तरीका

Facebook फीडबैक की गयी संभावित फर्जी न्यूज़ की पहचान के लिए मशीन लर्निंग का प्रयोग करती हैं| फिर इन न्यूज़ को फैक्ट-चेकर्स के पास भेजती है| टूल्स में फोटोज और विडियोज से सम्बंधित फैक्ट्स जाँच किए जाते हैं और रीवर्स इमेज सर्चिंग तकनिकी का प्रयोग करके वैसे ही फोटोज वेब पर खोजी जाती हैं| फैक्ट-चेकर्स लोकेशन, डेट और टाइम, फाइल टाइप, फोटो मोडिफिकेशन एक्सपोजर और डिवाइस जैसी डिटेल्स के लिए इमेज मेटाडाटा का विश्लेषण करता है|
Facebook के अनुसार फैक्ट-चेकर्स अन्य सभी रिसर्चस का उपयोग करके कंटेंट की सत्यता और असत्यता की परख कर सकता हैं|

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